"जिन्दगी भर गुफ्तगू की गैरों से, मगर मुझको अपने से मुलाकात न हुई. "जिन्दगी भर गुफ्तगू की गैरों से, मगर मुझको अपने से मुलाकात न हुई.
मैने बचपन से बहुत सुना है कि आत्मविश्वास से बढकर कुछ भी नही है । परंतु बचपन से ही मुझमे मैने बचपन से बहुत सुना है कि आत्मविश्वास से बढकर कुछ भी नही है । परंतु बचपन से ह...
पेड़ हो या इन्सान अपनी जड़ों से अलग हो कर कब ज़िन्दा रह पाया है। पेड़ हो या इन्सान अपनी जड़ों से अलग हो कर कब ज़िन्दा रह पाया है।
अतः इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि किसी को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिेए। अतः इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि किसी को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिेए।
निर्मला घर का सारा काम निबटाकर हर रोज लंबा सफर तय करके आती. निर्मला घर का सारा काम निबटाकर हर रोज लंबा सफर तय करके आती.
भगवान् के घर देर है अंधेर नहीं है भगवान् के घर देर है अंधेर नहीं है